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नई दिल्ली
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नवगीत परिचर्चा पुस्तक मेला, नई दिल्ली

, पुस्तक मेले के इतिहास में पहली बार- १७ फरवरी, २०१५ (मंगलवार), समय - सुबह ११ से १२ बजे के बीच पुस्तक मेले के हॉल सख्या - आठ में नवगीत पर एक विशेष परिचर्चा / संवाद का आयोजन किया गया। ‘समाज का प्रतिबिम्ब हैं नवगीत’ विषय का प्रवर्तन करते हुए इस परिचर्चा का संचालन नवगीतकार ओमप्रकाश तिवारी ने किया। विषय पर वक्तव्य प्रस्तुत करने वाले अन्य विद्वान थे- वरिष्ठ नवगीतकार एवं समालोचक राधेश्याम बंधु, नवगीतकार एवं समीक्षक आचार्य संजीव सलिल, नवगीतकार डॉ. जगदीश व्योम तथा नवगीताकार सौरभ पांडेय। चर्चा में वक्तव्य के बाद प्रश्नोत्तरी को दर्शकों ने उपयोगी बताया।

विषय का प्रवर्तन करते हुए संचालक एवं नवगीतकार ओमप्रकाश तिवारी ने कहा कि नवगीत लिखे तो लगभग 50 वर्ष से जा रहे हैं, लेकिन आज भी इस काव्य विधा को छंद मुक्त कविताओं की तुलना में यह कहकर उपेक्षित किया जाता है कि छंदबद्ध कविताएं दैनंदिन जीवन की समस्याएं बयान नहीं कर पातीं। वरिष्ठ नवगीतकार राधेश्याम बंधु ने इसे गेय कविता के साथ षड्यंत्र बताते हुए कहा कि जनमानस की अभिव्यक्तियां गीतों के जरिए ही अभिव्यक्त हो सकती हैं और यह दायित्व आजके नवगीतकार बखूबी निभा रहे हैं। गीत विधा को भारतीय समाज का अभिन्न अंग बताते हुए नवगीतकार सौरभ पांडे ने कहा कि गीत वायवीय तत्त्वों को सरस ढंग से ले आते हैं, जबकि नवगीत आज के समाज के सुखों-दुखों को सरसता से सामने लाते हैं। नवगीत समीक्षक आचार्य संजीव सलिल ने कहा कि काव्यात्मक ढंग से सुख-दुख की बात करना ही रचनाकर्म है और यह तत्त्व आज के नवगीतों में भली-भांति देखने को मिल रहा है। 

विषय का समापन करते हुए वरिष्ठ नवगीतकार डॉ. जगदीश व्योम ने कहा कि नवगीत अपनी विशिष्ट शिल्प-शैली के कारण हिंदी साहित्य में महत्त्वपूर्ण स्थान रखते हैं। डॉ. व्योम के अनुसार नई कविता जो बात छंदमुक्त होकर कहती है, वही बात लय और शब्द प्रवाह के माध्यम से नवगीत व्यक्त करते हैं। पुस्तक मेले के साहित्य मंच पर हुए इस परिसंवाद में जगदीश पंकज, गीता पंडित, शरदिंदु मुखर्जी, महिमा श्री, योगेंद्र शर्मा एवं वेद शर्मा आदि नवगीतकारों ने नवगीत के विभिन्न आयामों पर चर्चा की।


Snapshot 3 (28-12-2011 03-15)
लखनऊ २६ एवं २७ नवंबर २०११ को अभिव्यक्ति विश्वम् के सभाकक्ष में जाल पत्रिकाओं अभिव्यक्ति एवं अनुभूति द्वारा नवगीत परिसंवाद एवं विमर्श का सफल आयोजन किया गया। इस अवसर पर १८ वरिष्ठ नवगीतकारों सहित नगर के जाने माने अतिथि, वेब तथा मीडिया से जुड़े लोग, संगीतकार व कलाकार उपस्थित थे। निरंतर दो दिवस चले छह सत्रों में नवगीत के विभिन्न पहलुओं, यथा- नवगीत की वर्तमान स्थिति, नवगीत का उद्गम इतिहास, वर्तमान चुनौतियों एवं नवगीत हेतु आवश्यक मानकों एवं प्रतिबद्धताओं पर विस्तृत सार्थक चर्चा हुई। चित्र में उद्घाटन करते हुए नवगीतकार माहेश्वर तिवारी
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